एक पहेली सा, सुकून का साया लिए
तेरी आदते,तेरी रूह की पहचान लिए
अपनी मासूमियत को इतलाह करने
फ़िज़्ज़ाओं में अपनी भीनी सी महक करने
दिल को एक एहसास
एक सुकून का अहसास
रूह को जैसे भा सा गया था तू
फ़िज़्ज़ाओं की भीनी सी महक में जैसे
जैसे समां गया था तू
एक पहेली सा, सुकून का साया लिए
समुद्र की सीपियाँ,कभी तराशती थी में कही
अंदर से इतना कोमल,इतना प्यारा
नज़ारे मेरे तो जैसे देखते ही बनते थे
मेरी नींदों में जैसे तू सोया करता था
फास्लो से भी जैसे तू भाया करता था
रूह को जैसे भा सा गया था तू
फ़िज़्ज़ाओं की भीनी सी महक में जैसे
जैसे समां गया था तू
मेरी फ़िज़्ज़ाओ को उड़ान देना
तेरी खूबसूरत यादों में नाम देना
जहां की एह्तिहत
मेरी तो तुझमे ही है
सुधीर की पराकाष्ठा ज्ञात नहीं अभी मुझे
बस यही दिन ओस की चमकती बूंदो सा है मुझे
रूह को जैसे भा सा गया है तू
फ़िज़्ज़ाओं की भीनी सी महक में जैसे
जैसे समां गया है तू

.jpg)




