नज़्में क्या है
आलापों से उभरी चीख
नहीं
झरने में फसा कराहता हुआ सा मेंढक
नहीं
वह भला कैसे हो सकता है
बारिश के पानी से बेहता हुआ तिनका
नहीं
हाथो की लकीरे
नहीं
फिर आखिर नज़्में क्या है
किसी तितली के उड़ने का अंदाज़
नहीं नहीं
वह भी भला कैसे हो सकता है
लक्षो से बेखबर राही
प्रेम की बाहो में सिमटे आसु
नहीं
नहीं,फिर क्या है यह नज़्म
खुली आज़ादी में पिरोहे हुए शब्द
गगन की चोटियों को चूमती फिज़ाएँ
झिलमिल तारो की दुनिया
परियो की कहानी
परिंदो की आवाज़
पल में प्यार
पल में दुःख
पर मन विशाल
इतना विशाल की दुनिया समां जाए
हाँ
हाँ,यही है नज़्म
नज़्म की पहचान यही है मेरे लिए
हाँ यही है नज़्म



.jpg)


